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गिरिडीह जिले के तीसरी प्रखंड की गुगनी पंचायत में जल जीवन मिशन के तहत बन रही ₹9.46 करोड़ की गुमगी पंचायत बहुग्रामीय जलापूर्ति योजना घोर प्रशासनिक लापरवाही और तकनीकी विरोधाभासों के चक्रव्यूह में फंसकर अधूरी लटकी हुई है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, इस योजना को पूरा करने का 18 महीने का अनुबंध मार्च 2026 में ही समाप्त हो चुका है, लेकिन जून बीत जाने के बाद भी जमीन पर पानी टंकी अधूरी खड़ी है। इस भारी लापरवाही के कारण गुमगी और सिंघो सहित दो पंचायतों के करीब 12 हजार ग्रामीण भीषण गर्मी में बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
इस योजना के बजट को लेकर अधिकारियों और संवेदक के बीच बयानों की नूराकुश्ती शुरू हो गई है। संवेदक विनीत सिंह का दावा है कि सरकार ने पिछले डेढ़ वर्ष से कोई राशि उपलब्ध नहीं कराई है, जिससे काम आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया है। इसके विपरीत, गिरिडीह जिला के कार्यपालक अभियंता राहुल कुमार का कहना है कि विभाग के स्तर पर संवेदक की कोई भी राशि बकाया नहीं है और फंड रोकने की बात पूरी तरह गलत है। तीसरी दक्षिणी भाग के जिला परिषद सदस्य रामकुमार रावत ने दोनों पक्षों के इस विरोधाभास को साफ तौर पर भ्रष्टाचार का संकेत बताया है। उन्होंने इस पूरे विषय को जिला परिषद की आगामी सामान्य बैठक में मजबूती से उठाने और दोषियों के खिलाफ लिखित स्पष्टीकरण के साथ उच्च स्तरीय जांच की मांग करने की बात कही है।
ग्रामीणों की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद आजसू नेता नारायण यादव ने गुमगी पंचायत स्थित निर्माणाधीन पानी टंकी स्थल का औचक निरीक्षण किया। वहां काम पूरी तरह ठप मिला और साइट पर लेबर व मिस्त्री सब गायब थे। आजसू नेता ने चेतावनी दी है कि यदि तुरंत काम शुरू नहीं किया गया, तो आजसू ग्रामीणों के साथ मिलकर पीएचईडी विभाग के खिलाफ उग्र आंदोलन करेगी। उधर, चमकी पहाड़ी पर अधूरी पानी टंकी के पास प्रदर्शन कर रहे गुमगी, सिंगराडीह लचकन, खिरोद और ककनी के ग्रामीणों का गुस्सा भड़का हुआ है। ग्रामीण रेखा देवी, यशोदा देवी, अनिल विश्वकर्मा व अन्य ने बताया कि शुरुआत में 10 महीने के भीतर पानी देने का वादा किया गया था। दो साल पहले ग्रामीणों द्वारा जमीन का विवाद सुलझाए जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। विभाग ने नए चापाकल देना भी बंद कर दिया है, जिससे ग्रामीण दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
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