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उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ में प्रदर्शन शुरू होने से पहले ही युवाओं को कथित तौर पर चेतावनी दी गई है। युवाओं को साफ़ कहा गया कि “ज़्यादा देर तक दिखे तो मुक़दमे हो जाएँगे, बुद्धि ठिकाने आ जाएगी।” अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाने की तैयारी कर रहे युवाओं को इस तरह सीधे तौर पर धमकाया गया है।
इस घटना के बाद अब सीधे व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर बुद्धि ठिकाने आने की ज़रूरत किसकी है—उन युवाओं की जो शिक्षा, रोज़गार और अपने भविष्य की बात कर रहे हैं, या उस व्यवस्था की जिसे जनता ने उनकी आवाज़ सुनने और समस्याओं का समाधान करने के लिए चुना है। लोकतंत्र में सवाल पूछने वालों को डराया नहीं जाता बल्कि उनकी बात सुनी जाती है, इसलिए जनता की आवाज़ का जवाब धमकी के बजाय संवाद और समाधान से दिया जाना चाहिए।
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