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झारखंड के पलामू जिले के पाटन ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले मेराल पंचायत के ‘परसवन टोला’ में आधुनिक युग में भी ग्रामीण एक बुनियादी सुविधा यानी पक्की सड़क के लिए तरस रहे हैं। इस मोहल्ले में लगभग 250 से 300 लोग रहते हैं, जो सालों से खेतों के बीच की एक पतली मेढ़ यानी कच्चे रास्ते के सहारे ही आवाजाही करने को मजबूर हैं।
बारिश के दिनों में यहाँ की स्थिति इतनी बदतर हो जाती है कि किसी की मृत्यु होने पर चार लोग मिलकर शव को ठीक से कंधा तक नहीं दे पाते, क्योंकि रास्ता बेहद संकरा और फिसलन भरा है। इस गांव में सड़क न होने और काली चिपचिपी मिट्टी के कारण कोई भी ऑटो या मोटरसाइकिल अंदर नहीं जा पाती है, जिससे ग्रामीणों को अपने वाहन मुख्य मार्ग पर ही खड़े करने पड़ते हैं। इसके अलावा, स्कूली बच्चों को जाने, मरीजों को अस्पताल ले जाने और बाजार जाने में ग्रामीणों को इसी जोखिम भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है। बारिश के मौसम में गड्ढों में पानी भरने से यह पूरा रास्ता स्विमिंग पूल की तरह नजर आता है और ट्रैक्टरों के चलने से गहरे दलदल में बदल जाता है।
इन भीषण समस्याओं के बीच परसवन टोला के ग्रामीणों की सरकार और प्रशासन से केवल एक ही पुरजोर मांग है कि उनके गांव तक आने-जाने के लिए जल्द से जल्द एक पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए ताकि उन्हें इस नारकीय जीवन से मुक्ति मिल सके।
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