इसलिए जरूरत है सामूहिक प्रयास की, अच्छी नीयत की और समाधान खोजने की। ताकि बाढ़ बिहार की नियति बनकर न रह जाए।
बाढ़ की समस्या के समाधान पर ऐसे सवालों की जरूरत है।
यह कोई मांग, विवाद या राजनीतिक सवाल नहीं है। बिहार का बहुत कुछ बाढ़ पर दांव लगा हुआ है, जिसमें बिहार हर साल हारता हुआ ही दिखता है।
हम बाढ़ पर तात्कालिक और अस्थायी समाधान कितना करते हैं, इससे आगे अब स्थायी समाधान पर बात होनी चाहिए। काफी देर पहले ही हो चुकी है। अब और कितनी देर करनी है?
यह कह देना कि पिछली सरकार ने क्या किया और क्या नहीं किया, जवाब नहीं हो सकता। सरकार में कोई भी रहे, सिस्टम में सभी लोग हैं—पक्ष भी और विपक्ष भी।
इसलिए जरूरत है सामूहिक प्रयास की, अच्छी नीयत की और समाधान खोजने की। ताकि बाढ़ बिहार की नियति बनकर न रह जाए।
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