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झारखंड के दुमका जिले के मसलिया स्थित कुसुमघाटा-2 आंगनबाड़ी केंद्र में नल-जल योजना की ज़मीनी हकीकत चौंकाने वाली सामने आई है। यहाँ योजना के तहत 5000 लीटर की एक बड़ी पानी की टंकी तो स्थापित कर दी गई है, लेकिन पानी की आपूर्ति के लिए बोरिंग का कहीं कोई नामोनिशान नहीं है। परिणामस्वरूप, टंकी में पानी पूरी तरह से नदारद है और वह मात्र एक ‘शोभा की वस्तु’ बनकर रह गई है, जिसका कोई उपयोग नहीं हो रहा है। इस स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं कि जनता के टैक्स के पैसों की इस खुलेआम बर्बादी का आखिर कौन जिम्मेदार है, और यह बिना बोरिंग के नल और टंकी का कैसा ‘विकास’ या ‘तमाशा’ है।
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