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घोषणाएं बड़ी, हकीकत अधूरी: भजनलाल सरकार में मेडल विजेताओं को सरकारी नौकरी और सम्मान का इंतजार।खेल मंत्री फेल, राजस्थान में खिलाड़ी बदहाल; मेडल जीतकर भी नौकरी और डाइट को तरस रहे युवा!”राजस्थान में खिलाड़ी मत बनिए!” – सोशल मीडिया पर फूटा खिलाड़ियों का गुस्सा, खेल मंत्री निशाने पर।
कागजों पर खेल का विकास, जमीन पर खिलाड़ी लाचार: राजस्थान खेल मंत्रालय पर लगे भ्रष्टाचार और राजनीति के आरोप।मेडल जेब में, उधारी सिर पर: राजस्थान के नेशनल प्लेयर्स बोले– ‘बिना भत्ते और डाइट के कैसे जीतें मेडल?’
हालिया दिनों में “खेल मंत्री फेल? राजस्थान में खिलाड़ी मत बनिए!” जैसे नैरेटिव सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुए हैं, जिसमें राज्य के खेल तंत्र की कई बड़ी कमियों को उजागर किया गया है।खिलाड़ियों द्वारा उठाए जा रहे मुख्य मुद्दे और उनकी बदहाली के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:
आर्थिक सहायता और सरकारी नौकरियों का अभावमेडल के बाद भी नौकरी नहीं: कई नेशनल और इंटरनेशनल मेडल विजेता खिलाड़ियों को लंबे समय से सरकारी नौकरियां नहीं मिली हैं।
घर का दबाव: आर्थिक तंगी के कारण खिलाड़ियों पर खेल छोड़कर घर संभालने या कमाने का भारी दबाव बन रहा है
नाकाफी इनाम राशि: मेडल जीतने पर सरकार द्वारा दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि खिलाड़ियों की बेसिक ट्रेनिंग के लिए भी पर्याप्त नहीं है।
भत्तों (TA/DA) का न मिलना और भ्रष्टाचार के आरोपकागजों पर भत्ता: राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं (Nationals) में खेलने जाने वाले खिलाड़ियों को टीए/डीए (TA/DA) देने का वादा किया जाता है, लेकिन फॉर्म भरने के बाद भी महीनों तक पैसा नहीं मिलता।फंड की हेराफेरी: खेल मंत्रालय पर खिलाड़ियों के हक का पैसा रोकने और खेल बजट में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं।
डाइट और बुनियादी सुविधाओं की कमीबिना उचित डाइट के संघर्ष: जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को सरकार की तरफ से कोई पौष्टिक डाइट या खेल किट नहीं मिल पा रही है, जिससे वे बिना किसी प्रशासनिक मदद के अपने दम पर मेडल ला रहे हैं।खराब बुनियादी ढांचा: जिला और ब्लॉक स्तर पर खेल मैदानों और आधुनिक कोचों की भारी कमी बनी हुई है।
खेल संघों में भारी राजनीति और पक्षपातपैसे देकर चयन का आरोप: खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के एक कथित बयान को लेकर भी विवाद गरमाया हुआ है, जिसमें खिलाड़ियों को पैसा देकर टीम में शामिल किए जाने जैसी धांधलियों का जिक्र है।भाई-भतीजावाद: खिलाड़ियों का आरोप है कि खेल संघों और खेल परिषदों पर नेताओं का कब्जा होने के कारण योग्य खिलाड़ियों को मौका नहीं मिलता और वे राजनीति की भेंट चढ़ जाते हैं
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