सजा देगी पुलिस या अदालत?
उठे गंभीर सवाल!…………..
गुजरात से सामने आए एक वीडियो ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
हत्या के आरोपी फैजल को पुलिस क्राइम सीन री-कंस्ट्रक्शन के लिए अलग-अलग स्थानों पर ले गई… लेकिन इस दौरान आरोपी के साथ कथित तौर पर डंडों से मारपीट के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
सवाल ये नहीं है कि आरोपी ने अपराध किया है या नहीं…
सवाल ये है कि सजा देने का अधिकार किसके पास है?
अगर कोई व्यक्ति हत्या जैसे गंभीर अपराध का आरोपी है, तो उसे गिरफ्तार करना, जांच करना और सबूत जुटाना पुलिस की जिम्मेदारी है।
लेकिन दोषी है या नहीं और क्या सजा मिलेगी—इसका फैसला अदालत करती है।
तो फिर सवाल उठता है…
क्या अब न्यायालय और जेलों की जरूरत नहीं बची?
क्या पुलिस की ऐसी कार्रवाई से अपराध पर सचमुच नियंत्रण लगेगा?
या फिर इससे कानून के राज और मानवाधिकारों पर ही सवाल खड़े होंगे?
कानून अपराधी के खिलाफ सख्त होना चाहिए…
लेकिन कानून के दायरे में।
क्योंकि अगर सजा सड़क पर ही मिलने लगे, तो फिर अदालत किसलिए है?
आप इस कार्रवाई को सही मानते हैं या गलत? अपनी राय जरूर बताइए।
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