माननीय जी, संजय गांधी की “स्वास्थ्य व्यवस्था” पर एक छोटा सा सवाल!*
*🔥• माननीय जी, संजय गांधी की “स्वास्थ्य व्यवस्था” पर एक छोटा सा सवाल!*
माननीय जी, संजय गांधी अस्पताल में लगी प्राइवेट AMRI और सोनोग्राफी मशीनों को आखिर कब हटवाया जाएगा, ताकि करोड़ों रुपये की सरकारी मशीनें भी कभी सांस ले सकें क्योंकि जब तक बाहर की मशीनें चलती रहेंगी, अंदर रखी करोड़ों की मशीनों को चलने का मौका शायद ही मिल पाए! और साहब, स्वास्थ्य व्यवस्था की बात हो ही रही है तो कभी सुबह-सुबह बिना किसी लाव-लश्कर के, आम आदमी की तरह संजय गांधी अस्पताल का एक चक्कर लगा आइए। आपके घर से ज्यादा दूर भी नहीं है। मरीज किस हालत में इलाज के लिए भटक रहे हैं, अस्पताल की व्यवस्था कैसी है और परिजन किन परेशानियों से गुजर रहे हैं—ये सब फाइलों में नहीं, अस्पताल की जमीन पर दिखाई देगा। एक तरफ सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की कमी और व्यवस्थाओं का रोना, दूसरी तरफ शहर में लगातार बढ़ते निजी नर्सिंग होम…
सवाल तो बनता है कि सरकारी अस्पताल में डॉक्टर मरीज देखें या निजी अस्पताल में अपनी प्रैक्टिस? और अगर हर गली-मोहल्ले में कुकुरमुत्ते की तरह नर्सिंग होम खुलते जाएंगे, तो सरकारी अस्पताल की व्यवस्था सुधरेगी कैसे? माननीय जी, भाषण और बयान अपनी जगह हैं, लेकिन संजय गांधी अस्पताल को भाषण नहीं, व्यवस्था चाहिए।
*कहावत है*
“जिसे दर्द होता है, वही इलाज ढूंढता है।”
लेकिन यहां तो मरीज इलाज ढूंढ रहा है और व्यवस्था शायद बयान! संजय गांधी में लगातार सामने आ रही घटनाओं पर अब सिर्फ बयान नहीं, जवाब और जिम्मेदारी भी चाहिए। वरना जनता यही कहेगी
“साहब, जुमलेबाजी बहुत हो गई… अब अस्पताल को अस्पताल रहने दीजिए, प्रयोगशाला मत बनाइए।”
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