उत्तर प्रदेश में 17 अतिपिछड़ी जातियों का रिजर्वेशन प्रकरण आज भी लंबित है तो उसका दोषी कोई और नहीं बल्कि खुद इनके बीच के तथाकथित नेता और बुद्धिजीवी हैं। जातिगत गुटबाजी के वशीभूत गली गली में संगठन और राजनैतिक पार्टी बनाकर जहां देखो वहीं राष्ट्रीय अध्यक्ष, प्रदेश अध्यक्ष और जिलाध्यक्षों की भरमार है लेकिन पेशा सबका चुनाव आते ही समाज को निजी स्वार्थ में बेंचने का खेल शुरू हो जाता है। यह बात शासन प्रशासन सरकार विपक्ष मिडिया और न्यायपालिका तक जानती है कि इनमें कोई यूनीटी नहीं है बल्कि सबके सब अपने अपने मान कनवा राजा बनकर घूमते हैं जबकि यही निर्णायक आवादी सत्ता की गेंमचेंजर है अगर एकजुट हो जाएं तो संख्यात्मक आरक्षण/हिस्सेदारी और संवैधानिक संरक्षण क्या जिसकी चाहेंगे सरकार बनेगी और जब ये एकजुट होंगे तो केंद्र बिंदु बनाकर समस्त वंचित अतिपिछड़ो की 40% आवादी का समागम होने में देर नहीं लगेगा फिर सत्ता की बागडोर हाथ में होगी। अतः 4 अक्टूबर को संतकबीरनगर में आयोजित सर्वदलीय महाबैठक में हम देख रहे हैं कि जितने लोग उतने विचार इससे कोई भी आयोजक परेशान हो जाएगा क्योंकि सबकी वाली कर पाना संभव नहीं बल्कि वैचारिक समायोजन के आधार पर ही एकीकरण का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। आप लोग मौके पर खलीलाबाद आइए जहां तय एजेंडे के मुताबिक आमने-सामने बैठा जाए ताकि धरातल से लेकर न्यायपालिका तक 17 अतिपिछड़ी जातियों के एकजुट आंदोलन का आगाज हो सकें अन्यथा टुकड़े टुकड़े गैंग में बंटकर अपनी डफ़ली अपनी राग अलापने का परिणाम सामने है।🙏
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