15 अगस्त पर केंद्रीय जेल रीवा से 15 आजीवन कारावास के कैदियों की रिहाई, एक महिला कैदी भी शामिल।
15 अगस्त पर केंद्रीय जेल रीवा से 15 आजीवन कारावास के कैदियों की रिहाई, एक महिला कैदी भी शामिल।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश शासन के जेल विभाग की ओर से केंद्रीय जेल रीवा में सजा में छूट का लाभ पाने वाले 15 आजीवन कारावास के कैदियों को रिहा किया गया। इनमें एक महिला कैदी भी शामिल है। सभी कैदी हत्या के मामले में IPC की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे थे।
जेल प्रशासन के मुताबिक, इन कैदियों की रिहाई के लिए राज्य शासन को प्रस्ताव भेजा गया था। शासन द्वारा निर्धारित रिहाई के मानदंड पूरे करने के बाद इन्हें 15 अगस्त के अवसर पर सजा में छूट का लाभ दिया गया।
रिहा होने वाले कैदियों में मिठाई लाल कोल, अमरीश नामदेव, बृजेश बैगा, सोनू बर्मन, केमला वासुदेव, सुरेंद्र प्रसाद शुक्ला, शिवकुमार महारा, राजकुमार, पालन और सबलाल, रंगलाल यादव, महिला कैदी लीलावती गोंड़, उमाशंकर गौतम, शिव संपत निषाद, राम दयाल चौकसे और राम खेलावन शामिल हैं।
जेल अधीक्षक एसके उपाध्याय ने बताया कि सभी कैदी रिहाई के निर्धारित मानदंडों को पूरा कर चुके थे। नियमों के तहत 14 वर्ष की वास्तविक सजा और माफी सहित कुल 20 वर्ष की अवधि पूरी करने के बाद इन्हें रिहाई का लाभ दिया गया।
जेल अधीक्षक ने बताया कि जेल में रहने के दौरान कैदियों को विभिन्न प्रकार का व्यावसायिक प्रशिक्षण भी दिया गया है, ताकि रिहाई के बाद वे अपने हुनर के माध्यम से जीविकोपार्जन कर सकें। उन्होंने रिहा होने वाले कैदियों से अपील की कि वे जेल से बाहर निकलने के बाद ऐसा कोई कृत्य न करें, जिससे उन्हें दोबारा जेल आना पड़े।
वहीं रिहाई के बाद उमाशंकर गौतम ने कहा कि उन्होंने जेल में रहते हुए अपने किए पर प्रायश्चित किया है। उन्होंने कहा कि मैं अपने पूर्व जन्मों के कर्मों के कारण जेल में था, यह विधि का विधान है और मैंने अपने पापों का प्रायश्चित किया।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर केंद्रीय जेल रीवा से हुई इन कैदियों की रिहाई उनके लिए नई शुरुआत का अवसर है। अब जेल प्रशासन को उम्मीद है कि प्रशिक्षण के जरिए आत्मनिर्भर होकर ये सभी समाज की मुख्यधारा में लौटेंगे।
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