गोखरही में बारिश नहीं, बदइंतजामी का सैलाब; चार घर ढहे, जिम्मेदारियों पर भी उठे सवाल
बांदा/तिंदवारी। गोखरही में बारिश ने गांव को पानी में डुबो दिया, लेकिन सवाल सिर्फ आसमान से बरसे पानी का नहीं, जमीन पर पसरी व्यवस्था की नाकामी का भी है। कमर तक पानी, गलियों में तेज बहाव और घरों में कैद जिंदगी ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।लगातार बारिश में राममूरत, बबलू सिंह, रवि यादव और रज्जू के कच्चे मकान ढह गए। राममूरत का घर रात दो बजे भरभराकर गिरा और गृहस्थी मलबे में दफन हो गई। कई परिवार सड़क और ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं, जबकि सड़ा भूसा मवेशियों के लिए भी संकट बन गया है।ग्रामीणों का आरोप है कि हर बरसात में यही त्रासदी दोहराती है, फिर भी स्थायी जलनिकासी की व्यवस्था नहीं की गई। ऐसे में सचिव अजित पाल की कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि सचिव का कहना है कि रात में ही जेसीबी लगाकर पानी निकासी शुरू करा दी गई थी।सवाल यह है कि राहत के लिए जेसीबी हर बार बारिश के बाद ही क्यों जागती है? अगर स्थायी नाला समय रहते बनता, तो क्या गांव को हर बरसात में पानी की कैद भुगतनी पड़ती? यह सिर्फ जलभराव नहीं, विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच पसरी खाई का आईना है।
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
जम्मू और कश्मीर
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड