सरकारी स्कूल के क्लासरूम में पढ़ाई की जगह भोजपुरी गानों पर डांस!वायरल वीडियो ने खोली शिक्षा व्यवस्था की पोल
*सरकारी स्कूल के क्लासरूम में पढ़ाई की जगह भोजपुरी गानों पर डांस!वायरल वीडियो ने खोली शिक्षा व्यवस्था की पोल*
बदवार। सरकारी स्कूलों में बच्चों को बेहतर शिक्षा देने और आधुनिक संसाधनों से जोड़ने के लिए लगाए गए टीवी अब सवालों के घेरे में हैं। बदवार के सरकारी स्कूल से सामने आए कथित वीडियो में क्लासरूम के भीतर टीवी पर भोजपुरी गाने बजते नजर आ रहे हैं, जबकि कुछ बच्चे गानों की धुन पर नाचते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद शिक्षा व्यवस्था और स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जिस क्लासरूम में बच्चों के हाथों में किताबें और कॉपियां होनी चाहिए थीं, जहां शिक्षक उन्हें पाठ पढ़ाते नजर आने चाहिए थे, वहां टीवी पर गाने और बच्चों का डांस चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल यह है कि स्कूलों में लगाए गए शैक्षणिक संसाधनों का उपयोग पढ़ाई के लिए हो रहा है या फिर मनोरंजन के लिए?
*टीवी लगा है तो क्या पढ़ाई भी हो रही है?*
सरकारी स्कूलों में स्मार्ट टीवी, डिजिटल कंटेंट और अन्य संसाधनों के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, ताकि ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों को आधुनिक शिक्षा मिल सके। लेकिन यदि इन्हीं संसाधनों का इस्तेमाल क्लासरूम में भोजपुरी गाने चलाने और बच्चों के डांस के लिए किया जा रहा है, तो निश्चित तौर पर यह व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
वीडियो के सामने आने के बाद अभिभावकों के बीच भी नाराजगी देखने को मिल सकती है। अभिभावकों का सवाल है कि वे अपने बच्चों को स्कूल पढ़ने के लिए भेजते हैं, लेकिन यदि कक्षा के भीतर पढ़ाई के बजाय इस तरह का माहौल बन रहा है तो बच्चों की शिक्षा का जिम्मेदार कौन है?
*जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल*
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्कूल में शिक्षक और जिम्मेदार अधिकारी क्या कर रहे थे? यदि यह वीडियो स्कूल परिसर और क्लासरूम का है, तो उस समय बच्चों की निगरानी कौन कर रहा था? क्या स्कूल प्रबंधन को इस गतिविधि की जानकारी थी? अगर जानकारी थी तो रोक क्यों नहीं लगाई गई और अगर जानकारी नहीं थी तो स्कूल में निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
वीडियो की सत्यता और पूरे घटनाक्रम की जांच होना जरूरी है। साथ ही शिक्षा विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि बदवार के सरकारी स्कूल में क्लासरूम के टीवी का उपयोग किस उद्देश्य से किया जा रहा था और संबंधित समय पर स्कूल में मौजूद जिम्मेदार कर्मचारियों की भूमिका क्या थी।
*सवाल सीधा है—क्लासरूम है या मनोरंजन का मंच?*
सरकारी स्कूलों में संसाधनों की कमी का रोना रोया जाता है। कहीं भवन नहीं, कहीं शिक्षक नहीं, कहीं सुविधाएं अधूरी हैं। ऐसे में जब स्कूलों में आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं, तब उनका उपयोग शिक्षा के बजाय मनोरंजन में होता दिखाई दे तो यह व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
बदवार के सरकारी स्कूल का यह मामला महज बच्चों के डांस का वीडियो नहीं, बल्कि स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था की निगरानी और जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल है। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराता है या फिर यह मामला भी वायरल वीडियो तक सीमित होकर रह जाएगा।
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