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देश में टोल टैक्स को लेकर बहस तेज होती जा रही है। जनता का कहना है कि पहले से ही रोड टैक्स, जीएसटी, पेट्रोल पर टैक्स और अन्य शुल्क चुकाने के बाद टोल टैक्स देना अतिरिक्त आर्थिक बोझ है। सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर लोग टोल वसूली की अवधि, सड़कों की गुणवत्ता और बढ़ते खर्च को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
सरकार का तर्क है कि टोल टैक्स से सड़क निर्माण और रखरखाव के लिए संसाधन जुटाए जाते हैं। हालांकि, जनता का मानना है कि टोल वसूली के बावजूद सड़कों की गुणवत्ता में सुधार नहीं हो रहा है। लोग यह भी सवाल कर रहे हैं कि आखिर टोल टैक्स की राशि कहाँ जा रही है और सड़कों की हालत में सुधार क्यों नहीं हो रहा है।
यह बहस थमने का नाम नहीं ले रही है और जनता की नाराजगी बढ़ती जा रही है। अलग-अलग पक्षों की अपनी-अपनी राय और तर्क हैं, लेकिन टोल टैक्स को लेकर जनता की चिंताएँ बढ़ती ही जा रही हैं।
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