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बिहार के नालंदा जिला अंतर्गत कतरीसराय थाना पुलिस ने फर्जी अपहरण और फिरौती मामले का 48 घंटे के भीतर सफल उद्भेदन किया है। पुलिस जांच में यह तथ्य सामने आया है कि यह मामला अपहरण का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश था। तथाकथित अपहृत व्यक्ति स्वयं साइबर ठगी गिरोह के संपर्क में था और छः प्रतिशत कमीशन के बदले अपना बैंक खाता उपलब्ध कराने गया था।
मामले के अनुसार, 21 जुलाई 2026 को अहियाचक, कतरीसराय निवासी वादी चंदन कुमार ने थाने में आवेदन देकर बताया था कि उनका छोटा भाई शिव कुमार वर्मा पटना दवाई लाने गया था और वापस नहीं लौटा। उसी रात करीब 12:45 बजे वादी के व्हाट्सएप पर कॉल आया कि उसके भाई को साइबर थाना द्वारा पकड़ा गया है और छोड़ने के एवज में 2.5 लाख रुपये मांगे गए। परिजनों ने बताए गए खाते में राशि भेज दी। इसके बाद कतरीसराय थाना कांड संख्या-354/26, भारतीय न्याय संहिता की धारा 140(2) के तहत मामला दर्ज किया गया।
नालंदा पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, राजगीर के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस टीम ने तकनीकी व मानवीय इनपुट के आधार पर तथाकथित अपहृत शिव कुमार वर्मा को छपरा कचहरी से सकुशल बरामद कर लिया। अपहृत के बताए अनुसार घटना में शामिल 03 अभियुक्तों—सुधीर कुमार (लहरी, नालंदा), जितेंद्र कुमार (धनरुआ, पटना) और अनुपम कुमार (हाल पता वेस्ट जजेज कॉलोनी आरपीएफ दानापुर, पटना)—को गिरफ्तार कर लिया गया है। पुलिस द्वारा अन्य संलिप्त अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापामारी की जा रही है।
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