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पश्चिमी सिंहभूम के मनोहरपुर क्षेत्र में झारखंड और ओडिशा को जोड़ने वाले धानापाली–कोपसिंगा–जराईकेला मार्ग पर स्थित कोयल नदी के ऊपर बना विशाल पुल एक पिलर धंसने के कारण कई वर्षों से अनुपयोगी पड़ा है। करोड़ों रुपये की लागत से बने इस पुल के बेकार होने से धानापाली और आसपास के गांवों के हजारों किसानों व आम लोगों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
धानापाली क्षेत्र कोयल नदी के किनारे स्थित एक प्रमुख कृषि क्षेत्र है, जहाँ की 90 प्रतिशत से अधिक आबादी खेती पर ही निर्भर है और साल भर सब्जियों का उत्पादन करती है। पुल क्षतिग्रस्त होने से किसानों को अपनी उपज मंडी तक पहुँचाने के लिए लंबा रास्ता चुनना पड़ रहा है, जिससे समय, श्रम और परिवहन खर्च कई गुना बढ़ गया है। पहले इस मार्ग से राउरकेला की दूरी महज 30 किलोमीटर थी, लेकिन अब लोगों को वैकल्पिक रास्ते से करीब 75 किलोमीटर का चक्कर काटना पड़ता है। इसका सबसे बुरा असर आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ा है, जहाँ समय पर राउरकेला के बड़े अस्पताल न पहुँच पाने के कारण देरी मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है।
वर्षों से इस समस्या को झेल रहे ग्रामीणों में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी है। लोगों का आरोप है कि हर लोकसभा और विधानसभा चुनाव में नेता पुल के पुनर्निर्माण का आश्वासन देते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सारे वादे भूल जाते हैं। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि करोड़ों की लागत से बना पुल कुछ ही सालों में कैसे धंस गया और क्या निर्माण में मानकों की अनदेखी व भ्रष्टाचार हुआ था। उन्होंने मांग की है कि मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराकर दोषी एजेंसियों और अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए तथा जल्द से जल्द नए मजबूत पुल का निर्माण कराकर राहत दी जाए।
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