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इंदौर के खजराना क्षेत्र में प्रस्तावित 100 बेड का सिविल अस्पताल पिछले लगभग छह वर्षों से सिर्फ कागज़ों पर ही चल रहा है। हैरानी की बात यह है कि जहाँ एक ओर अस्पताल की बिल्डिंग का निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है और न ही मरीजों के लिए कोई सुविधाएँ शुरू की गई हैं, वहीं दूसरी ओर इसके लिए 87 पदों को स्वीकृत कर उन पर भर्ती और पदस्थापन भी कर दिए गए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, नियुक्त किए गए अधिकांश कर्मचारियों को फिलहाल अन्य सरकारी अस्पतालों में तैनात किया गया है। यह स्थिति इसलिए बनी हुई है क्योंकि अस्पताल के लिए आवश्यक भूमि अधिग्रहण और भवन निर्माण का कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है। इस पूरे मामले को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं और संबंधित अधिकारियों व व्यवस्थापक से जवाबदेही की मांग की जा रही है।
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