मैनपुरी के थाना एलाऊ क्षेत्र के अंतर्गत नगला अनी गांव में बिजली की केबल डालने को लेकर हुए विवाद और उसके बाद विकास कुमार नामक युवक की मौत के मामले में अब आरोपी पक्ष पहली बार खुलकर सामने आया है। मुख्य आरोपी के परिजनों और खुद को चश्मदीद बताने वाले लोगों ने घटना को लेकर अपना पक्ष रखते हुए दावा किया है कि इस पूरे मामले में निर्दोष लोगों को फंसाया गया है। उनका आरोप है कि राजनीतिक दबाव और वोट बैंक की राजनीति के चलते उनके परिवार के कई नाबालिग बच्चों तक को हत्या और एससी/एसटी एक्ट के मुकदमे में नामजद कर दिया गया है।
मुख्य आरोपी जितेंद्र सिंह की पत्नी सरिता ने घटना का ब्योरा देते हुए दावा किया कि विवाद वाले दिन उनका 11 वर्षीय बेटा पिंटू बिजली की केबल डालने गया था, तभी छोटेलाल जाटव और उनके परिजनों ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी। बेटे को बचाने पहुंचे जितेंद्र सिंह पर भी हमला किया गया। सरिता का आरोप है कि दूसरी तरफ से कुल्हाड़ी, लाठी-डंडों और ईंटों से हमला किया गया, जिससे उनके परिवार के सात लोग गंभीर रूप से घायल हो गए और उनका इलाज कराया गया। सरिता ने यह भी बड़ा दावा किया कि जिस विकास कुमार की बाद में मौत हुई, वह घटना के समय मौके पर मौजूद ही नहीं था। उनके अनुसार, विकास पेशे से राजमिस्त्री का काम करता था और कुछ समय पहले काम के दौरान ऊंचाई से गिरकर घायल हो गया था, जिसका इलाज भी चला था। उन्होंने कहा कि 3 जुलाई की घटना के वीडियो में भी विकास कहीं दिखाई नहीं दे रहा है।
घटना के प्रत्यक्षदर्शी होने का दावा करने वाले गांव के ही सत्यपाल सिंह ने भी सरिता के दावों का समर्थन किया है। उन्होंने बताया कि जितेंद्र का बेटा पिंटू केवल केबल डालने गया था, जहां कहासुनी के बाद दूसरी ओर से लाठी-डंडों से मारपीट शुरू कर दी गई। सत्यपाल ने भी विकास कुमार के पहले से घायल होने की बात दोहराई और मुकदमे में नाबालिगों को नामजद किए जाने की निष्पक्ष जांच की मांग की। गौरतलब है कि नगला अनी गांव में केबल डालने के विवाद के बाद एक युवक की इलाज के दौरान मौत हो गई थी, जिसके बाद पुलिस ने हत्या और एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर मुख्य आरोपी को जेल भेज दिया है। आरोपी पक्ष का कहना है कि वे न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करते हैं, लेकिन जांच केवल आरोपों के नहीं बल्कि साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए ताकि किसी भी निर्दोष को सजा न मिले।
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