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उत्तर प्रदेश की 57,694 ग्राम पंचायतों में पूर्व प्रधानों की प्रधानी अब पूरी तरह समाप्त हो गई है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने योगी सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसके तहत पूर्व प्रधानों को ही प्रशासक के रूप में नियुक्त किया गया था।
हाई कोर्ट ने संविधान के नियमों का हवाला देते हुए इस आदेश को रद्द किया है, जिसमें स्पष्ट है कि किसी भी प्रधान का कार्यकाल 5 साल से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता। स्रोत में यह प्रश्न उठाया गया है कि सरकार ने विधानसभा चुनाव में फायदे के लिए संवैधानिक नियमों के विपरीत ऐसा कदम क्यों उठाया।
इस फैसले से यूपी की राजनीति में एक बड़ी हलचल मच गई है, जहां इसे योगी सरकार के एक “बड़े दांव” की विफलता के तौर पर देखा जा रहा है। इस सियासी उथल-पुथल के पीछे के पूरे सच को समझने के लिए चुनाव आयोग के बड़े खुलासों और ओबीसी आरक्षण आयोग की रिपोर्ट में हो रही देरी जैसे अन्य संबंधित मुद्दों का भी उल्लेख किया गया है।
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