शुरू न्यूज़
लखीमपुर खीरी जिले की तहसील धौरहरा क्षेत्र की ग्राम सभा दुर्गापुर पड़री में एक गंभीर मामला सामने आया है, जहाँ कथित तौर पर फर्जी वरासत के माध्यम से सरकारी पट्टे की भूमि पर आर्यावर्त बैंक से लगभग 5.40 लाख रुपये का किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण स्वीकृत करा लिया गया है। इस पूरे प्रकरण ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे क्षेत्रीय लेखपाल और राजस्व निरीक्षक पर मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, ग्राम सभा दुर्गापुर पड़री निवासी अनुसूचित जाति के बेचन पुत्र श्रीपति को करीब 50 वर्ष पूर्व गाटा संख्या 25 (ग) और 328 वाली कुल 1.530 हेक्टेयर भूमि का पट्टा आवंटित हुआ था। ग्रामीण बताते हैं कि बेचन पिछले लगभग 20 वर्षों से मजदूरी के लिए गाँव से बाहर हैं और तब से वापस नहीं लौटे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इसी बीच, 10 जून 2026 को क्षेत्रीय लेखपाल कैलाश यादव और राजस्व निरीक्षक सुरेश चंद्र ने कथित रूप से बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के गाँव के ही सोनम पुत्र महंगू निषाद के नाम वरासत दर्ज कर दी। ग्रामीणों का दावा है कि सोनम अनपढ़ और सीधे-सादे व्यक्ति हैं और उन्हें इस पूरी कार्यवाही की कोई जानकारी नहीं थी।
आरोप है कि इसी कथित फर्जी वरासत के आधार पर ₹5.40 लाख का केसीसी ऋण स्वीकृत कराया गया। ग्रामीणों का कहना है कि ऋण की राशि संबंधित लोगों ने आपस में बांट ली और सोनम को इसकी भनक तक नहीं लगी। इस मामले की जानकारी होने पर सोनम ने जिला अधिकारी, लखीमपुर खीरी को एक प्रार्थना पत्र देकर पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने, कथित फर्जी वरासत को निरस्त करने और दोषी अधिकारियों के साथ अन्य संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। यदि ग्रामीणों द्वारा लगाए गए ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह मामला राजस्व अभिलेखों में कथित हेराफेरी और सरकारी भूमि के दुरुपयोग का एक बड़ा उदाहरण सिद्ध हो सकता है। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की जांच पर टिकी हैं कि इस गंभीर प्रकरण में सच्चाई उजागर करने और दोषियों पर कार्रवाई के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड