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राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के रायपुर थाना क्षेत्र के लड़की गांव में एक जमीन विवाद ने गहरा रूप ले लिया है। पीड़ित परिवार ने पुलिस पर पक्षपात करने और थाने में मारपीट करने के गंभीर आरोप लगाते हुए शुक्रवार शाम करीब 4 बजे पुलिस अधीक्षक सागर राणा को एक ज्ञापन सौंपा है। परिवार ने इस मामले में निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई की मांग की है। राजपूत समाज के प्रतिनिधियों के साथ पहुंचे परिवार ने रायपुर थाने में तैनात कांस्टेबल गोरखाराम के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे निलंबित करने की भी मांग की है।
पीड़ित राजू सिंह ने बताया कि लड़की गांव में उनके पड़ोसी भैरू रावल से लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। राजू सिंह के अनुसार, 30 जून को भैरू रावल उनके बाड़े में घुस आया और पपीते तथा अमरूद के पेड़ काट दिए। जब इसका विरोध किया गया, तो भैरू रावल ने राजू सिंह की माता के साथ अभद्रता की और कुल्हाड़ी दिखाकर जान से मारने की धमकी दी। इस घटना की शिकायत रायपुर थाने में दर्ज कराने के बावजूद पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई।
परिवार का आरोप है कि शिकायत के बाद मौके पर पहुंचे कांस्टेबल गोरखाराम ने कार्रवाई करने के बजाय पहले कथित आरोपी पक्ष से बातचीत की। इसके बाद दोनों पक्षों की महिलाओं के बीच कहासुनी हुई, जिसका कांस्टेबल वीडियो बनाता रहा, लेकिन उसने विवाद रोकने या उचित कार्रवाई करने का कोई प्रयास नहीं किया। पीड़ित परिवार के अनुसार, 1 जुलाई की रात कांस्टेबल गोरखाराम और अन्य पुलिसकर्मी राजू सिंह के भाई गोटू सिंह को बयान लेने के बहाने रायपुर थाने ले गए, जहां रातभर उसके साथ मारपीट की गई और उसे बिना किसी अपराध के थाने में ही बैठाए रखा गया। अगले दिन जमानत पर रिहा होने के बाद गोटू सिंह की तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उसे पहले रायपुर अस्पताल और फिर महात्मा गांधी अस्पताल, भीलवाड़ा रेफर किया गया, जहां उसका उपचार जारी है।
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि पुलिस आरोपी पक्ष को संरक्षण दे रही है और भैरू रावल उनके बाड़े के पास स्थित गली पर कब्जा करना चाहता है। ज्ञापन में कांस्टेबल गोरखाराम और इस मामले से संबंधित अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें निलंबित करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष विभागीय जांच कराने की पुरजोर मांग की गई है।
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