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बस्ती जिले के कप्तानगंज वन रेंज के अंतर्गत दुबौलिया ब्लॉक में हरे-भरे पेड़ों की बड़े पैमाने पर अवैध कटान का काला कारोबार फल-फूल रहा है। आरोप है कि वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कथित मिलीभगत से यह सब हो रहा है, जबकि सरकार पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण महाअभियान पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है।
यह मामला ग्राम पंचायत सरैया बक्शी के राजस्व गांव रमवापुर में बिना परमिट के आम के पेड़ों की कटाई से जुड़ा है। दो दिन बीत जाने के बाद भी विभाग द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न होने से उनकी संलिप्तता पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि हल्का वन दरोगा अभिषेक यादव और वन रक्षक शाश्वत दूबे मौके पर पहुंचकर कानूनी कार्रवाई करने के बजाय मामले को दबाने और लीपापोती करने में जुटे हैं। रमवापुर राजा ग्राम पंचायत में महुआ जैसे बहुमूल्य और संरक्षित पेड़ को तो तीसरी बार काट गिराया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभिषेक यादव और शाश्वत दूबे की शह पर चिलमा और दुबौलिया बीट में प्रतिदिन अवैध कटान का यह खेल जारी है।
इस ‘सुनियोजित संरक्षण’ के चलते लकड़ी माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्हें कानून का कोई डर नहीं रह गया है। वन विभाग के इन कर्मचारियों की कथित मनमानी से न केवल दुबौलिया क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र खतरे में पड़ गया है, बल्कि सरकारी खजाने को भी लाखों रुपये प्रतिमाह की चपत लग रही है। अवैध कटान के खिलाफ विभागीय कार्रवाई न होने से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है और वे प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठा रहे हैं। क्षेत्रीय जनता ने अब जिला प्रशासन और वन विभाग के उच्च अधिकारियों से दुबौलिया और चिलमा बीट में हुई अवैध कटान की निष्पक्ष जांच कराने के साथ-साथ हल्का वन दरोगा अभिषेक यादव और वन रक्षक शाश्वत दूबे की संदिग्ध भूमिका की जांच कर उनके खिलाफ कठोर विभागीय कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
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