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लखीसराय के मनोकामना गार्डन में मंगलवार को प्रशिक्षित ग्रामीण चिकित्सक संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष अंशु तिवारी ने घोषणा की कि केंद्र सरकार ने बिहार सरकार को पत्र भेज दिया है। उन्होंने बताया कि बहुत जल्द सभी प्रशिक्षित ग्रामीण चिकित्सकों को स्वास्थ्य विभाग में स्थान मिलेगा। राष्ट्रीय अध्यक्ष ने बिहार सरकार पर उदासीनता का आरोप लगाते हुए स्पष्ट किया कि अब यह ‘आर-पार की लड़ाई’ होगी।
इस राज्य स्तरीय बैठक में लखीसराय के जिला अध्यक्ष नित्यानंद पांडे, उपाध्यक्ष प्रवीण कुमार, सचिव सुनील कुमार, कोषाध्यक्ष संजीत कुमार और महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष अनीता कुमारी सहित शेखपुरा, जमुई, मुंगेर, बेगूसराय, खगड़िया, पटना, भागलपुर, नवगछिया समेत कई जिलों के पदाधिकारी मौजूद थे। मंच संचालन प्रवीण कुमार और सुनील कुमार ने किया। चिकित्सकों ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के सामने अपनी 10 सूत्री मांगें रखीं। बैठक में बताया गया कि बिहार में कुल 33,000 और अकेले लखीसराय में 400 प्रशिक्षित ग्रामीण चिकित्सक आज बेरोजगारी की मार झेल रहे हैं।
चिकित्सकों ने सीधे सरकार को घेरते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री बनने से पहले वादा किया था कि वे उनकी लड़ाई लड़ेंगे, लेकिन अब कुर्सी पर होने के बावजूद उनकी बात नहीं सुनी जा रही है। उन्होंने याद दिलाया कि जब पूरा देश कोरोना से थर्रा रहा था, तब ग्रामीण चिकित्सकों ने बिना डर, बिना रुके लोगों की सेवा की थी, लेकिन आज उसी सेवा का सिला उन्हें दाने-दाने को मोहताज होकर भटकना मिल रहा है।
राष्ट्रीय अध्यक्ष अंशु तिवारी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि बिहार सरकार की उदासीनता के कारण अब तक चिकित्सकों को स्वास्थ्य विभाग में जगह नहीं मिल पाई है, लेकिन अब यह समय खत्म हो चुका है। उन्होंने चेतावनी दी कि उनकी लड़ाई अब और तेज होगी, जिसके तहत लखीसराय से विधानसभा तक का घेराव किया जाएगा। अंशु तिवारी ने यह भी कहा कि अगर बात नहीं बनी, तो इस आंदोलन को सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुँचाया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ग्रामीण चिकित्सक अपना हक लेकर रहेंगे और कोरोना काल में जान की परवाह किए बिना सेवा करने वालों को अब सम्मान और नौकरी मिलनी ही चाहिए।
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