केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जंतर-मंतर पर पिछले एक महीने से भी ज्यादा समय से विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों, युवाओं और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की लगातार मांग के बाद यह कदम सामने आया है। शुक्रवार को केंद्र सरकार के प्रतिनिधियों के साथ मुलाकात में सीजेपी के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट कर दिया था कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान पद नहीं छोड़ते, प्रदर्शन जारी रहेगा। शनिवार को इस्तीफा देते हुए प्रधान ने कहा कि उन्हें प्रजातंत्र पर पूरा भरोसा है।
इस्तीफे की खबर के बाद जंतर-मंतर पर डटे CJP के नेताओं और समर्थकों ने इसे आंदोलन की बड़ी जीत बताते हुए जश्न मनाया। पार्टी के नेता अभिजीत दिपके ने समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि लगातार संघर्ष की वजह से सरकार को झुकना पड़ा है। दिपके ने कहा, ‘हमने कर दिखाया। धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। लोग कहते थे कि इस सरकार में इस्तीफे नहीं होते, लेकिन हमने साबित कर दिया कि झुकती है दुनिया, झुकाने वाला चाहिए।’ उन्होंने स्पष्ट किया कि आंदोलन का मकसद सिर्फ मंत्री का इस्तीफा नहीं, बल्कि कथित अनियमितताओं से प्रभावित छात्रों को न्याय दिलाना है।
अभिजीत दिपके ने पीड़ित छात्रों के लिए लड़ाई जारी रखने का वादा करते हुए कहा, ‘पीड़ितों के लिए मैं लड़ूंगा, न्याय दिलाऊंगा।’ आंदोलन के प्रतीक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘कॉकरोच एक बार घुसता है तो निकलता नहीं है।’ इसके साथ ही उन्होंने सरकार के सामने मांग रखी कि कथित तौर पर परीक्षा विवाद के कारण आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा और उचित सहायता प्रदान की जाए।
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