बस्ती जिले के स्वास्थ्य ढांचे में एक बड़ी खामी सामने आई है, जहां जिला महिला अस्पताल आईसीयू और ब्लड बैंक जैसी जीवन रक्षक सुविधाओं के अभाव में केवल एक ‘रेफर सेंटर’ बनकर रह गया है। इसके कारण गंभीर स्थिति वाली गर्भवती महिलाओं की जान पर आफत बनी हुई है और उन्हें मजबूरी में मेडिकल कॉलेज या निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है। अस्पताल की लचर व्यवस्था के चलते रोजाना औसतन तीन से चार गंभीर मरीजों को रेफर किया जा रहा है, जिससे गरीब मरीज निजी अस्पतालों की भारी-भरकम फीस चुकाने को मजबूर हैं और समय पर इलाज न मिलने से उनकी जान का जोखिम बना रहता है।
अस्पताल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में 3382 और वर्ष 2025-26 (अप्रैल से अब तक) में 788 प्रसव हुए हैं। जून 2026 में अस्पताल में कुल 600 प्रसव दर्ज किए गए, जबकि जुलाई के महज एक सप्ताह के भीतर दर्जनों महिलाएं रेफर की गईं, जिनमें से कुछ दिनों में रोजाना 3 से 5 मरीज रेफर किए गए। इलाज के नाम पर हो रही इस दौड़-धूप का एक मामला तब सामने आया, जब प्लेटलेट्स कम (79 हजार) होने पर एक गर्भवती महिला को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। वहां पहुंचकर महिला की हालत और बिगड़ गई और उसके प्लेटलेट्स गिरकर महज 295 तक पहुंच गए, जिससे उसका परिवार मानसिक और आर्थिक रूप से पूरी तरह टूट गया।
इस बदहाल व्यवस्था पर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक अनिल कुमार ने बताया कि अस्पताल में ब्लड बैंक और जनरल यूनिट की तैयारी के प्रयास चल रहे हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञों की भारी कमी है और स्वीकृत पदों के मुकाबले बेहद कम डॉक्टर तैनात हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आईसीयू वार्ड न होने के कारण गंभीर मरीजों का ऑपरेशन करना असंभव हो जाता है, जिसके चलते उन्हें रेफर करना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन ने इस संबंध में शासन से तत्काल हस्तक्षेप और संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की है।
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