नबी हजरत मोहम्मद की अजमत और सीरत के संदेश के साथ हजारीबाग में निकला जुलूस-ए-मोहम्मदी
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मूसलाधार बारिश भी नहीं डिगा सकी अकीदतमंदों का हौसला, “सरकार की आमद मरहबा” के उद्घोष से गूंजता रहा शहर
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हजारीबाग। 1501वें जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के मुबारक अवसर पर बुधवार को हजारीबाग शहर में अकीदत, एहतराम और धार्मिक उत्साह के साथ जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। जामा मस्जिद सेंट्रल कमेटी के तत्वावधान में आयोजित इस जुलूस में शहर के विभिन्न मोहल्लों के साथ-साथ आसपास के गांवों से करीब 100 जुलूस शामिल हुए। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने पूरे उत्साह और जोश के साथ भाग लिया।
जामा मस्जिद रोड से निकाले गए जुलूस-ए-मोहम्मदी की निगरानी एदारा-ए-शरिया के चीफ काजी एवं जामा मस्जिद के खतीब व इमाम मुफ्ती अब्दुल जलील सादी की देखरेख में की गई। जुलूस के दौरान नबी-ए-करीम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की अजमत, सीरत और सुन्नतों का बयान करते हुए नात-ए-रसूल पेश की गई।
*मूसलाधार बारिश में भी नहीं थमा जुलूस*
जुलूस-ए-मोहम्मदी के दौरान दोपहर करीब 3 बजे से लगातार मूसलाधार बारिश होती रही। बारिश ने एक मिनट के लिए भी पीछा नहीं छोड़ा, लेकिन बारिश की परवाह किए बिना अकीदतमंद पूरे उत्साह और अकीदत के साथ जुलूस में शामिल रहे। तेज बारिश के बावजूद लोगों का जोश और धार्मिक उत्साह चरम पर देखने को मिला।
बारिश के बीच भी नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की अजमत और शान में नारे गूंजते रहे। “सरकार की आमद मरहबा, दिलदार की आमद मरहबा, मुख्तार की आमद मरहबा” के उद्घोष से पूरा हजारीबाग शहर गुंजायमान होता रहा। अकीदतमंदों का यह जज्बा जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के प्रति उनकी गहरी आस्था और मोहब्बत को प्रदर्शित कर रहा था।
*सादगी और एहतराम के साथ जुलूस निकालने की की गई थी अपील*
जामा मस्जिद सेंट्रल कमेटी की ओर से जुलूस को सादगी और एहतराम के साथ निकालने की अपील पहले से की जा रही थी। कमेटी के पदाधिकारियों ने 12 रबीउल अव्वल से करीब दस दिन पूर्व ही विभिन्न गांवों और मोहल्लों में पहुंचकर कमेटियों एवं मोहल्ले के सदर-सचिवों से मुलाकात की थी। इस दौरान जुलूस को अनुशासित, सादगीपूर्ण और धार्मिक भावना के अनुरूप निकालने का आह्वान किया गया था।
कई जुलूस नात-ए-रसूल, दरूद-ओ-सलाम और नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत व अजमत के संदेश के साथ सादगीपूर्ण तरीके से आगे बढ़े, जिसकी लोगों ने सराहना की। वहीं कुछ स्थानों पर तेज आवाज में डीजे बजने को लेकर आम लोगों में नाराजगी भी देखने को मिली। लोगों का कहना था कि जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी का वास्तविक संदेश नबी-ए-करीम की सीरत, सुन्नत, अखलाक और इंसानियत की शिक्षा को जन-जन तक पहुंचाना है। कुछ लोगों ने यहां तक कहा कि समाज में दिल के मरीज के अलावे गंभीर रोगी एवं कई वृद्ध लोग भी रहते हैं जिनको तेज ध्वनि से लगातार खतरा बना रहता है। ऐसे में किसी की जान भी जा सकती है और इसको लेकर पिछले वर्ष के जुलूस ए मोहम्मदी के दौरान डीजे के शोर से एक व्यक्ति की मृत्यु भी हो चुकी थी इसलिए ऐसे खतरों से बचना चाहिए और डीजे के शोर से लोगों को हमेशा बचना चाहिए। यह कहीं से दुरूस्त नहीं है। हजारीबाग के ओलमा ए कराम ने विशेष तौर पर डीजे से परहेज करने और खुराफात से बचने की लोगों से आह्वान किया था उसके बावजूद कुछ गांव मोहल्ले से डीजे का शोर थमने का नाम नहीं लिया जो एक चिंता का विषय है।
*सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम*
जुलूस के दौरान प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। शहर के विभिन्न स्थानों पर दंडाधिकारी एवं पुलिस बल के जवानों की तैनाती की गई थी। प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे जुलूस पर नजर रखते हुए शांतिपूर्ण माहौल में कार्यक्रम संपन्न कराने के लिए पूरी मुस्तैदी दिखाई।
*जगह-जगह हुआ जुलूस का स्वागत*
जुलूस के मार्ग में विभिन्न सामाजिक एवं सेवा संगठनों तथा जनप्रतिनिधियों की ओर से स्वागत शिविर लगाए गए। इन शिविरों में जुलूस में शामिल अकीदतमंदों के बीच फल, शरबत, पानी, बिस्किट सहित अन्य सामग्री का वितरण किया गया। सेवा और स्वागत के इस कार्य की लोगों ने सराहना की।
*सीरत, सुन्नत और इंसानियत का दिया पैगाम*
इस वर्ष हजारीबाग में निकले जुलूस-ए-मोहम्मदी ने एक महत्वपूर्ण संदेश भी दिया कि नबी हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सीरत और सुन्नतों को अपने जीवन में अपनाते हुए सादगी, अनुशासन, एहतराम और इंसानियत के साथ जश्न मनाया जा सकता है। कई जुलूसों में नात-ए-रसूल और सीरत-ए-पाक के संदेशों के माध्यम से यही भावना दिखाई दी।
बहरहाल, मूसलाधार बारिश के बावजूद अकीदतमंदों के उत्साह में कोई कमी नहीं आई और जश्न-ए-ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर निकला जुलूस-ए-मोहम्मदी अकीदत, धार्मिक उत्साह और भाईचारे के माहौल में संपन्न हुआ। पूरे आयोजन के दौरान नबी-ए-करीम हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की अजमत, सीरत, सुन्नत और इंसानियत के पैगाम को प्रमुखता से याद किया गया।
जुलूस-ए-मोहम्मदी के दौरान जुलूस का स्वागत करने वालों में पूर्व मंत्री एवं कांग्रेस के जिला अध्यक्ष जयप्रकाश भाई पटेल, वार्ड नंबर 16 के पार्षद जमील अहमद उर्फ बब्लू कुरैशी, जमील खान, जामा मस्जिद सेंट्रल कमिटी के इरफान अहमद काजू, शकील बिहारी, साबिर अली, कांग्रेस प्रदेश संयोजक विनोद कुशवाहा, सदर विधानसभा के पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी मुन्ना सिंह, कांग्रेस अल्पसंख्यक मोर्चा प्रदेश महासचिव तस्लीम अंसारी, शादाब कुरैशी, झामुमो केंद्रीय सदस्य मोहम्मद इजहार, झामुमो जिला कोषाध्यक्ष मोहम्मद अख्तर, झामुमो नगर उपाध्यक्ष शोएब खान, कांग्रेस जिला उपाध्यक्ष बाबर अंसारी, मोहम्मद रब्बानी, मोहम्मद मासूक, कांग्रेस नगर अध्यक्ष परवेज अहमद, कटकमसांडी अल्पसंख्यक कांग्रेस अध्यक्ष हैदर अली, पेलावल दक्षिणी पंचायत समिति सदस्य सलाउद्दीन उर्फ बबलू, पेलावल उत्तरी पंचायत समिति सदस्य मोहम्मद साबिर, एआईएमआईएम जिला उपाध्यक्ष मिस्बाह उल इस्लाम, शाहरुख कुरैशी, मोईनुद्दीन खान, समाजसेवी जेपी जैन, रामकिशोर सावंत, सुबोध आकाश, शब्बीर अहमद, मकसीर आलम, एन जी मेमोरियल स्कूल के निदेशक हाजी परवेज आलम, राजू , युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष मोहम्मद जाबिर, नौशाद सहित कई समाजसेवी, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य लोग शामिल थे।
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