उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के बभनान क्षेत्र में पत्रकारों की कार्यशैली को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। यहाँ के दो तथाकथित ‘बाबू साहब’ पत्रकारों पर अपने ही एक साथी पत्रकार को प्रताड़ित करने, उसे ‘मरवाने’ में भूमिका निभाने और बाद में दबाव डालकर समझौता कराने के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। सूत्रों के अनुसार, इन पत्रकारों ने पीड़ित पत्रकार को डराया कि यदि वह समझौता नहीं करेगा, तो उसे धारा 376 (बलात्कार) के गंभीर मामले में फंसा दिया जाएगा। अजीत मिश्रा (खोजी) के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम से स्थानीय पत्रकारिता जगत में भारी हड़कंप मच गया है।
इस विवाद के पीछे स्वार्थ और पत्रकारिता का एक बड़ा गठजोड़ सामने आया है। आरोप है कि बभनान के इन पत्रकारों की ‘दुकान’ स्थानीय चेयरमैन की मेहरबानी पर चल रही है, जिसके कारण वे अपराधियों के खिलाफ आवाज उठाने के बजाय पीड़ित को ही प्रताड़ित करने और अपराधियों के साथ खड़े होने में जुट गए। यहाँ तक कि ये पत्रकार समझौते का दबाव बनाने के लिए मिठाई का डिब्बा लेकर पीड़ित के घर तक पहुँच गए थे। इस कृत्य के बाद अब अन्य पत्रकारों और पत्रकार संगठनों से ऐसे आचरण वाले पत्रकारों का पूरी तरह से बहिष्कार करने की मांग की जा रही है। साथ ही, चेयरमैन के भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभियान चलाने और उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने का आह्वान भी किया गया है।
इस पूरे प्रकरण पर डरपोक पत्रकारिता को लेकर तीखा तंज कसा गया है। स्पष्ट शब्दों में सलाह दी गई है कि यदि किसी पत्रकार में भ्रष्टाचार या भ्रष्टाचारियों के खिलाफ लड़ने की हिम्मत नहीं है, तो उसे तत्काल पत्रकारिता का पेशा छोड़ देना चाहिए। पत्रकारों को नसीहत दी गई है कि वे सोशल मीडिया पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय संयम बरतें और सही समय आने का इंतजार करें, क्योंकि धैर्य रखकर ही ऐसे बड़े विवादों का प्रभावी और सम्मानजनक जवाब दिया जा सकता है।
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
जम्मू और कश्मीर
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड