बस्ती नगर पालिका परिषद द्वारा शहर में चलाया जा रहा ‘विशेष सफाई अभियान’ महज एक कागजी खानापूर्ति और फोटोशूट बनकर रह गया है। नगर अध्यक्ष नेहा वर्मा के निर्देशन और अध्यक्ष प्रतिनिधि अंकुर वर्मा की मौजूदगी में नालियों की सफाई तो की जा रही है, लेकिन धरातल पर यह अभियान पूरी तरह फेल साबित हो रहा है। मानसून की पहली बारिश होते ही सड़कों पर कचरे का अंबार लग गया है और नालियों से निकाला गया कचरा वापस उसी में समा रहा है।
स्थानीय निवासियों में इस लचर व्यवस्था को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि नालियों से गाद और कचरा निकालकर सड़क किनारे ही छोड़ दिया जाता है, जो तेज रफ्तार वाहनों और हल्की बारिश के कारण वापस नाली में चला जाता है। जनता इसे सफाई के बजाय केवल ‘कचरे का स्थान परिवर्तन’ बता रही है। इस लापरवाही के कारण थोड़ी सी बारिश में ही सड़कें जलमग्न हो जाती हैं, और गंदगी की सड़ांध व मच्छरों के प्रकोप से लोगों का जीना मुहाल हो चुका है।
जनता ने सीधे तौर पर नगर पालिका प्रशासन को घेरते हुए सवाल उठाया है कि क्या उनके पास सिर्फ सफाई करने का बजट है, कचरा ढोने का नहीं? स्थानीय नागरिकों ने इस दिखावे के अभियान को तत्काल बंद कर जलभराव का स्थायी समाधान खोजने और नालियों से निकले कचरे को तुरंत डंपिंग साइट पर पहुंचाने की दो टूक मांग की है। लोगों की चेतावनी है कि अगर इस व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो यह अभियान केवल सरकारी धन की बर्बादी और जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा ही रहेगा।
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