बस्ती जिले के विक्रमजोत ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली ‘अमोढ़ा खास’ ग्राम पंचायत का ‘बतासी जोत’ गांव आज प्रशासनिक उपेक्षा के कारण कीचड़ और दलदल में जीने को मजबूर है। केंद्र और राज्य सरकारों के विकास के बड़े-बड़े दावों के विपरीत, 10 हजार की आबादी वाला यह गांव बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहा है। इस गांव को पूर्व में ‘लोहिया समग्र’ गांव घोषित किया गया था और इसे ‘सांसद आदर्श गांव’ के रूप में गोद भी लिया गया था, लेकिन धरातल पर सच बिल्कुल अलग है।
गांव की सबसे बड़ी समस्या यहां की बदहाल सड़क है, जो आज तक पक्की नहीं हो पाई है। बरसात के दिनों में यह मार्ग घुटनों तक भरे कीचड़ और जलभराव के कारण नरक में तब्दील हो जाता है। इस दलदल से होकर गुजरना स्कूली बच्चों और बुजुर्गों के लिए एक जानलेवा चुनौती बन चुका है, जिससे आए दिन ग्रामीणों के गिरकर चोटिल होने का डर बना रहता है। प्रशासन की इस घोर संवेदनहीनता के बावजूद लोग गांव से बाहर निकलने के लिए इसी कीचड़ से गुजरने को विवश हैं।
लगातार अनदेखी से परेशान होकर गांव के निवासी पंकज कुमार ने 11 जुलाई को मुख्यमंत्री के ‘जनसुनवाई पोर्टल’ पर शिकायत दर्ज कराई है और गांव तक पक्की सड़क के निर्माण की मांग की है। अब देखना यह है कि इस बड़े प्रशासनिक मंच पर शिकायत के बाद अधिकारी और जनप्रतिनिधि कोई कदम उठाते हैं या यह मामला फिर फाइलों में दब जाता है। इस बदहाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं कि आखिर ‘सांसद आदर्श ग्राम’ और ‘लोहिया समग्र’ का विकास बजट कहां गया? क्या 14 पुरवों वाले इस बड़े गांव की अनदेखी किसी बड़े भ्रष्टाचार का संकेत है और जिम्मेदार अधिकारियों की यह चुप्पी कब टूटेगी?
अपना राज्य चुनें
अंडमान और निकोबार द्वीप समूह
बिहार
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हरियाणा
हिमाचल प्रदेश
जम्मू और कश्मीर
झारखंड
मध्य प्रदेश
राजस्थान
उत्तर प्रदेश
उत्तराखंड