उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जिले के बौरव्यास स्थित ‘राष्ट्रीय इंटर कॉलेज’ (विद्यालय कोड: 721021) में प्रबंधक और प्रधानाचार्य की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली का मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता राममिलन द्वारा जिलाधिकारी के समक्ष दिए गए प्रार्थना पत्र के बाद इस ‘लूट’ और तानाशाही रवैये का पर्दाफाश हुआ है, जिससे पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
शिकायत के अनुसार, विद्यालय प्रशासन द्वारा शासन के नियमों को ताक पर रखकर छात्रों से दोगुनी फीस वसूली जा रही है और इसकी कोई रसीद भी नहीं दी जा रही है। ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी), अंकपत्र और चरित्र प्रमाण पत्र देने के नाम पर छात्रों से ₹100 से लेकर ₹500 तक की अवैध वसूली की जा रही है। इसके अलावा, कक्षा 11 और 12 की फीस को आधिकारिक बैंक खाते में जमा करने के बजाय प्रबंधक और प्रधानाचार्य आपस में बांट रहे हैं। स्कूल पर कोविड-19 काल के दौरान कक्षा 6 से 8 के विद्यार्थियों के लिए आए मध्याह्न भोजन (एमडीएम) और जूता-मोजा की डीबीटी धनराशि में हेराफेरी करने और कागजों पर छात्रों की संख्या अधिक दिखाकर सरकारी धन हड़पने का भी गंभीर आरोप है।
इस गंभीर मामले पर संतकबीरनगर के जिलाधिकारी आलोक कुमार ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा है कि विद्यार्थियों का शोषण किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, बेलहर की खंड शिक्षा अधिकारी अनीता तिवारी ने भी मामले को अत्यंत गंभीर बताते हुए निष्पक्ष जांच का भरोसा दिया है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस भ्रष्टाचार पर क्या ठोस कार्रवाई करता है या फिर मामला हमेशा की तरह लीपा-पोती की भेंट चढ़ जाता है।
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