बस्ती जिले के बभनान नगर पंचायत में एक पत्रकार के साथ हुई बर्बरतापूर्ण मारपीट की घटना ने स्थानीय प्रशासन और राजनीति में हड़कंप मचा दिया है। बभनान नगर पंचायत अध्यक्ष प्रबल मलानी और उनके समर्थकों पर पत्रकार विनोद जायसवाल को सरेआम पीटने और धमकाने का गंभीर आरोप लगा है। यह पूरी घटना तब शुरू हुई जब पत्रकार विनोद जायसवाल ने बभनान में हो रहे घटिया नाली निर्माण में भ्रष्टाचार को उजागर करती एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। इसी रंजिश के चलते 10 जुलाई को उन्हें सरेआम पीटा गया, और जब अगले दिन 11 जुलाई को वे गौर थाने में शिकायत दर्ज कराने जा रहे थे, तब उन पर दोबारा हमला किया गया। मारपीट की यह पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हुई है, जिसमें कथित तौर पर चेयरमैन को पत्रकार के साथ मारपीट करते हुए देखा जा सकता है।
इस घटना ने स्थानीय प्रशासनिक निष्क्रियता और राजनीतिक संरक्षण के गंभीर सवालों को जन्म दिया है। आरोप है कि चेयरमैन प्रबल मलानी के भाजपा से जुड़े होने के कारण गौर थाने में तहरीर देने के बावजूद पुलिस ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। लेख में तीखा तंज कसते हुए कहा गया है कि यदि यही कृत्य विपक्ष यानी समाजवादी पार्टी (सपा) के किसी चेयरमैन ने किया होता, तो अब तक तुरंत एफआईआर दर्ज हो चुकी होती। इसके अतिरिक्त, पद संभालने से पहले आदर्श छवि रखने वाले प्रबल मलानी पर अब निरंकुश होने, पैसे मांगने और रंगदारी वसूलने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
यह मामला पत्रकार बिरादरी के भीतर की गुटबाजी और समाज की संवेदनहीनता को भी उजागर करता है। जहां सरेआम हो रही इस मारपीट के दौरान आम जनता मूकदर्शक बनी रही और किसी ने बीच-बचाव नहीं किया, इसे समाज का एक घिनौना सच बताया गया है। वहीं पत्रकार बिरादरी के ही कुछ दलाल किस्म के लोगों पर आरोप है कि उन्होंने पीड़ित पत्रकार का साथ देने के बजाय भ्रष्ट चेयरमैन से हाथ मिला लिया। इन लोगों ने पत्रकार विनोद जायसवाल के खिलाफ साजिश रचकर झूठी खबरें फैलाईं और शिकायतें दर्ज करवाईं। लेखक का स्पष्ट मत है कि डरकर या समझौतावादी होकर पत्रकारिता करने से बेहतर है कि पत्रकारिता छोड़ दी जाए, और यदि अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करनी है तो पत्रकारों को आपसी गुटबाजी से ऊपर उठना होगा।
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