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हजारीबाग नगर निगम का बुलडोजर मंगलवार को एक बार फिर गरीबों की रोजी-रोटी पर चला, जब सहायक नगर आयुक्त अनिल पांडेय के नेतृत्व में जिला परिषद चौक और उसके आसपास के इलाकों से अतिक्रमण हटाया गया। इस अचानक हुई कार्रवाई में सब्जी, फल, चाय-नाश्ता, मोची और सैलून चलाने वाले दर्जनों फुटपाथ दुकानदारों को हटा दिया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई।
इस कार्रवाई के बाद फुटपाथ दुकानदारों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने नगर निगम की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। दुकानदारों ने आरोप लगाया कि गांधी मैदान के बाहर नगर निगम कर्मियों की मिलीभगत से ‘जुहू चौपाटी’ जैसी स्थिति बना दी गई है, जहाँ प्रतिदिन सैकड़ों ठेले लगते हैं और लगातार जाम की स्थिति बनी रहती है। उनके अनुसार, इस क्षेत्र में कभी अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं होती क्योंकि निगम के कुछ कर्मचारी प्रतिदिन ठेला संचालकों से वसूली करते हैं, और इसी वजह से उस इलाके को जानबूझकर नजरअंदाज किया जाता है।
दुकानदारों का कहना है कि वे अतिक्रमण हटाने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन कानून सभी के लिए समान होना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि अगर जिला परिषद चौक से अतिक्रमण हटाया जा सकता है, तो गांधी मैदान के बाहर वर्षों से सड़क घेरकर बैठे लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं होती। दुकानदारों ने यह भी सवाल उठाया कि क्या नगर निगम का बुलडोजर सिर्फ कमजोर और गरीबों के लिए ही है, जबकि कथित संरक्षण वाले अतिक्रमण पर प्रशासन की नजर नहीं पड़ती।
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