मांदर की थाप, झारखंडी गीतों की गूंज और पारंपरिक नृत्यों से सजा गुमला
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*विश्व आदिवासी दिवस पर नगर भवन में आयोजित हुआ झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026*
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*जल, जंगल, जमीन से संस्कृति और आजीविका तक-आदिवासी विरासत के संरक्षण, अधिकारों के सम्मान और सशक्तिकरण का जीवंत मंच बना महोत्सव
गुमला: मांदर की थाप, झारखंडी लोकगीतों की गूंज, पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुतियां और झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक रविवार को नगर भवन, गुमला में कुछ ऐसा ही मनोहारी दृश्य देखने को मिला। अवसर था विश्व आदिवासी दिवस का और मंच था झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 का।
विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन, गुमला के तत्वावधान में जिला सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग एवं जिला कल्याण विभाग / आईटीडीए द्वारा संयुक्त रूप से नगर भवन, गुमला में जिला स्तरीय झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपायुक्त गुमला दिलेश्वर महत्तो उपस्थित रहे। वहीं पुलिस अधीक्षक हारिस बिन जमा, वन प्रमंडल पदाधिकारी अहमद बेलाल अनवर, उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन, जिला परिषद अध्यक्षत किरण माला बाड़ा,नगर परिषद अध्यक्षता शकुंतला उरांव, अपर समाहर्ता राजीव नीरज सहित जिले के अन्य वरीय पदाधिकारी विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए।
इसके अलावा परियोजना निदेशक ITDA, जिला नजारत उप समाहर्ता ललन कुमार रजक, SDPO गुमला, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी आरती कुमारी, जिला मत्स्य पदाधिकारी कुसुम लता, जिला कल्याण पदाधिकारी आलोक रंजन, जिला शिक्षा पदाधिकारी कविता खालको, जिला शिक्षा अधीक्षक नूर आलम खां,जिला कृषि पदाधिकारी, जिला हॉर्टिकल्चर पदाधिकारी, सहित विभिन्न विभागों के जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम स्थल पर अतिथियों का स्वागत मांदर की थाप, झारखंडी गीतों और पारंपरिक नृत्य के साथ किया गया। मांदर की गूंज और लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच नगर भवन का पूरा वातावरण झारखंड की आदिवासी संस्कृति के रंग में रंग गया।
*वीर महापुरुषों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को किया गया नमन*
मुख्य कार्यक्रम से पूर्व उपायुक्त गुमला दिलेश्वर महत्तो, पुलिस अधीक्षक हारिस बिन जमा, वन प्रमंडल पदाधिकारी अहमद बेलाल अनवर, उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन सहित जिले के वरीय पदाधिकारियों ने वीर महापुरुषों एवं स्वतंत्रता सेनानियों को माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धापूर्वक नमन किया।
इसके पश्चात सभी अतिथि एवं पदाधिकारी नगर भवन में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में शामिल हुए। मुख्य अतिथि उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो सहित अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलित कर झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 का विधिवत शुभारंभ किया गया।
*“जल, जंगल, जमीन की रक्षा के साथ अपनी संस्कृति को बचाए रखना आदिवासी समाज की पहचान” : उपायुक्त*
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो ने विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जिले के सभी आदिवासी समुदाय के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई दी।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज के लोग जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहे हैं और अपनी संस्कृति एवं परंपराओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि आज प्रस्तुत किए गए पारंपरिक नृत्य एवं कला झारखंड की आदिवासी सांस्कृतिक विरासत का उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
उपायुक्त ने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति का सम्मान करता है और अपनी विरासत एवं संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रयास करता है। आज जब दुनिया की कई संस्कृतियां विलुप्त होने की ओर हैं, ऐसे समय में अपनी संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने के लिए एकजुट होकर इन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस वर्ष 1995 से पूरी दुनिया में मनाया जा रहा है और आने वाले समय में भी झारखंड सहित पूरे देश में इसे सांस्कृतिक महोत्सव के रूप में मनाते हुए आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत को सम्मान दिया जाता रहेगा।
उपायुक्त ने गुमला की समृद्ध आदिवासी सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कार्यक्रम में शामिल कलाकारों, समुदाय के प्रबुद्ध सदस्यों, लाभुकों एवं सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया और महोत्सव के सफल आयोजन के लिए शुभकामनाएं दीं।
*“संस्कृति के उत्सव के साथ विकास और योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना भी जरूरी” : उप विकास आयुक्त*
उप विकास आयुक्त अनिमेष रंजन ने कहा कि झारखंड आदिवासी महोत्सव केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्कृति, परंपरा और विकास को एक साथ जोड़ने का अवसर है। उन्होंने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए विद्यार्थियों एवं कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
उन्होंने कहा कि प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को बधाई देते हुए अन्य प्रतिभागियों को भी भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कार्यक्रम में पहुंचे लाभुकों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जिला प्रशासन का प्रयास है कि विभिन्न विभागों की योजनाओं का लाभ पात्र लाभुकों तक पहुंचे।
*अधिकार की मान्यता से आत्मनिर्भरता तक – महोत्सव में मिला संस्कृति, सम्मान और सशक्तिकरण का संदेश*
झारखंड आदिवासी महोत्सव के अवसर पर आदिवासी समुदाय के अधिकारों, आजीविका एवं सांस्कृतिक परंपराओं को सशक्त करने की दिशा में कई महत्वपूर्ण गतिविधियां आयोजित की गईं।
वनाधिकार अधिनियम, 2006 के तहत चार समितियों के बीच कुल 3344.67 एकड़ रकबे का सामुदायिक वन पट्टा वितरित किया गया।
इसी क्रम में सरना घेराबंदी के चार समितियों के लाभुकों के बीच पूजन सामग्री का वितरण किया गया। वहीं, आदिवासी समाज की पारंपरिक सामुदायिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दो समितियों के धुमकुड़िया भवन के लिए वाद्य यंत्र प्रदान किए गए।
महिला सशक्तिकरण एवं आजीविका संवर्धन की दिशा में तीन स्वयं सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं के बीच कुल 15.50 लाख रुपये की लिंकेज ऋण राशि का वितरण किया गया।
वहीं, राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन (NMNF) के तहत चयनित 508 अनुसूचित जनजाति कृषकों को योजना से जोड़ते हुए लाभ प्रदान किया गया।
*14 विभागों के स्टॉल बने आकर्षण का केंद्र*
महोत्सव के दौरान जिला प्रशासन की विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों की जानकारी आमजनों तक पहुंचाने के उद्देश्य से 14 विभिन्न विभागों एवं संस्थानों द्वारा स्टॉल लगाए गए।
इन स्टॉलों के माध्यम से आम नागरिकों एवं लाभुकों को संबंधित विभागों की योजनाओं, सेवाओं एवं लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया की जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में ITDA, वन विभाग, जिला समाज कल्याण विभाग, सामाजिक सुरक्षा विभाग, JSLPS, स्वास्थ्य विभाग, उद्यान विभाग, मत्स्य विभाग, कृषि विभाग, आपूर्ति विभाग, शिक्षा विभाग, पंचायती राज विभाग, हिंडालको तथा सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग द्वारा स्टॉल लगाए गए।
उपायुक्त दिलेश्वर महत्तो, पुलिस अधीक्षक हारिस बिन जमा, वन प्रमंडल पदाधिकारी अहमद बेलाल अनवर सहित अन्य वरीय पदाधिकारियों ने विभिन्न स्टॉलों का निरीक्षण किया तथा विभागीय योजनाओं एवं गतिविधियों की जानकारी ली।
कार्यक्रम में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए लाभुकों, कलाकारों, विद्यार्थियों, स्वयं सहायता समूह की महिलाओं, कृषकों एवं आम नागरिकों ने भी भाग लिया।
_झारखंड आदिवासी महोत्सव 2026 ने गुमला की उस सांस्कृतिक पहचान को एक बार फिर जीवंत किया, जिसमें मांदर की थाप केवल संगीत नहीं, बल्कि परंपरा की आवाज है; लोकनृत्य केवल प्रस्तुति नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही विरासत है; और जल, जंगल, जमीन केवल संसाधन नहीं, बल्कि जीवन एवं अस्तित्व का आधार हैं।_
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