उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कृष्णा नगर स्थित ‘सत्यार्थ हॉस्पिटल’ में इलाज के नाम पर लापरवाही का एक रूह कंपा देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ हाथ के एक सीधे-सादे ऑपरेशन के लिए भर्ती कराए गए रायबरेली के रहने वाले 38 वर्षीय लालजी सोनकर की मौत हो गई। मृतक के भाई राहुल सोनकर ने 14 जुलाई की सुबह 9:30 बजे उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था, जहाँ डॉक्टरों ने दोपहर 3 बजे तक सब ठीक होने का भरोसा दिया था। सभी मेडिकल रिपोर्ट सामान्य होने के बावजूद अस्पताल की बदइंतजामी और डॉक्टरों की कथित लापरवाही ने मरीज की जान ले ली।
परिजनों का गंभीर आरोप है कि ऑपरेशन करने वाले मुख्य डॉक्टर नशे की हालत में थे। रात करीब 8:30 बजे जब भाई राहुल को अंदर बुलाया गया, तो उन्होंने देखा कि डॉक्टर की आंखें लाल थीं, हाथ कांप रहे थे और जुबान लड़खड़ा रही थी। मरीज की जान जाने के बाद डॉक्टर ने केवल इतना कहा कि “हमने बहुत कोशिश की” और इसके तुरंत बाद अस्पताल मालिक व अन्य डॉक्टरों ने मुख्य आरोपी डॉक्टर को गाड़ी में बिठाकर फरार कर दिया। घटना के बाद अस्पताल के गेट पर ताला लगा दिया गया और उनके फोन बंद हो गए। यहाँ तक कि पुलिस के सामने भी अस्पताल प्रबंधन सीना तानकर खड़ा है और डॉक्टरों को बुलाने से साफ इनकार कर रहा है।
इस पूरे मामले में कई डॉक्टरों की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है। ऑपरेशन करने वाले मुख्य आरोपी डॉ. विनय त्रिपाठी पर नशे की हालत में इलाज करने का गंभीर आरोप है, जबकि ऑपरेशन थिएटर में मौजूद डॉ. आशीष यादव और डॉ. सुमन शेखर मूकदर्शक बने रहे। इसके अलावा एनेस्थेटिस्ट के तौर पर फाइल पर हस्ताक्षर करने वाले डॉ. दिलीप सिंह तथा अस्पताल प्रशासन से जुड़े डॉ. विवेक मल्होत्रा व डॉ. सतेन्द्र पाण्डेय भी सवालों के घेरे में हैं। पीड़ित राहुल सोनकर अब खून से सनी पर्ची लेकर अपने भाई के लिए न्याय की आस में दर-दर भटक रहे हैं।
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