बस्ती शहर के तथाकथित पॉश और विकसित इलाके ‘आवास विकास’ के वार्ड नंबर 23 में मुख्य मार्ग पर टूटी नाली का पत्थर पिछले कई महीनों से प्रशासन की घोर संवेदनहीनता की कहानी बयां कर रहा है। सड़क के बीचो-बीच खुला यह गड्ढा अब स्थानीय लोगों और राहगीरों के लिए एक ‘मौत का कुआं’ बन चुका है, जिससे किसी भी दिन बड़ी अनहोनी हो सकती है। इस व्यस्ततम मार्ग से रोजाना गुजरने वाले सैकड़ों मासूम स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और दफ्तर जाने वाले लोग अपनी जान जोखिम में डालने को मजबूर हैं।
रात के अंधेरे और बरसात के दौरान यह गड्ढा साक्षात यमराज की तरह राहगीरों के सामने खड़ा रहता है। अब तक कई लोग इस नाली में गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं, लेकिन बस्ती नगर पालिका परिषद के जिम्मेदार अधिकारी कुंभकर्णी नींद में सोए हुए हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने नगर पालिका प्रशासन से लेकर संबंधित अधिकारियों तक दर्जनों बार गुहार लगाई, लेकिन हर बार उन्हें केवल कोरे आश्वासनों की घुट्टी पिलाकर वापस भेज दिया गया। ‘पॉश’ इलाके की इस दुर्दशा ने नगर पालिका के विकास के दावों की पूरी पोल खोलकर रख दी है।
इस बदहाली से आक्रोशित वार्ड 23 के बाशिंदों ने अब जिला प्रशासन से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। स्थानीय नागरिकों ने कड़ी चेतावनी दी है कि यदि समय रहते नाली का पत्थर दुरुस्त नहीं किया गया, तो भविष्य में होने वाली किसी भी दुर्घटना की संपूर्ण जिम्मेदारी नगर पालिका परिषद बस्ती की होगी। जनता अब तीखे सवाल पूछ रही है कि क्या जनहित के काम के लिए भी उन्हें सड़क पर उतरना पड़ेगा या फिर प्रशासन किसी गंभीर हादसे के बाद ही अपनी नींद से जागने की रस्म अदायगी करेगा।
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