बस्ती जिले के कृषि विभाग में एक विवादित तबादला संशोधन ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। इस मामले में प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और कृषि निदेशक पंकज त्रिपाठी की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि एसटी (ST) दीप नारायण वर्मा के तबादले को मनमाने ढंग से संशोधित किया गया है, जिसके पीछे कथित ‘आर्थिक सौदेबाजी’ और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की चर्चा जोरों पर है।
नियमों के अनुसार, केंद्र सरकार की प्राथमिकता वाले नौ जिलों—श्रावस्ती, बलरामपुर, बहराइच, सिद्धार्थनगर, भदोही, चित्रकूट, चंदौली, सोनभद्र और फतेहपुर—में तैनात किसी भी कर्मचारी का तबादला रोकने या संशोधित करने का कोई प्रावधान नहीं है। इन जिलों में तीन साल की सेवा अनिवार्य है और केवल विशेष परिस्थितियों में ही मुख्यमंत्री की मंजूरी से संशोधन संभव है। इसके बावजूद, बस्ती से श्रावस्ती भेजे गए दीप नारायण वर्मा का तबादला जिस तत्परता से संशोधित किया गया, उससे बिना मुख्यमंत्री की अनुमति के किसी बड़े लेनदेन (मोटा लिफाफा) के होने की आशंका जताई जा रही है।
इस मामले में व्यक्तिगत स्वार्थों के लिए पद के दुरुपयोग का भी गंभीर आरोप लगाया गया है। आरोप है कि दीप नारायण वर्मा के भाई की भानपुर में खाद की दुकान है, जहाँ विभागीय अधिकारियों के रसूख का इस्तेमाल कर होलसेलर्स पर अधिक खाद देने और उधार देने का दबाव बनाया जाता है। दीप नारायण वर्मा को जेडीए (JDA) और पूर्व भूमि संरक्षण अधिकारी डॉ. राजमंगल चौधरी का करीबी माना जाता है, जिनकी मदद से उसने लखनऊ मुख्यालय में पोस्टिंग सुनिश्चित करवाई ताकि बस्ती में अपने और अपने भाई के वैध-अवैध कारोबार को सुरक्षित तरीके से संचालित किया जा सके। इसके अलावा, वर्मा के भाई बालमुकुंद की पत्नी रीना चौधरी के नाम पर संचालित ‘रामा ट्रेडर्स’ के जरिए मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में प्रतिवर्ष होने वाले लाखों के रसायनों की खरीद में धांधली करने और आउटसोर्सिंग ऑपरेटर के रूप में काम करते हुए भ्रष्टाचार को अंजाम देने का आरोप है।
श्रावस्ती जैसे काम के बोझ वाले जिलों में कोई भी अधिकारी या कर्मचारी जाना नहीं चाहता, और बस्ती में जमे रहने के लिए रचे गए इस पूरे ‘तंत्र’ ने विभाग की साख पर बट्टा लगा दिया है। विभागीय चुप्पी पर सवाल उठाते हुए यह स्पष्ट किया गया है कि यदि वर्मा का यह तबादला निरस्त नहीं हुआ, तो यह साबित हो जाएगा कि विभाग में नियमों से ऊपर ‘सौदेबाजी’ हावी है।
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